Showing posts with label भारत में 'मानवाधिकार हनन' मामले. Show all posts
Showing posts with label भारत में 'मानवाधिकार हनन' मामले. Show all posts

Sunday, February 22, 2009

भारत में 'मानवाधिकार हनन' मामले

भारत में 'मानवाधिकार हनन' मामले बढ़े


वामपंथी दलों ने सरकार पर अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा न करने का आरोप लगाया सरकारी आँक़ड़ों के अनुसार वर्ष 2006-07 के मुकाबले में वर्ष 2007-08 में भारत में अल्पसंख्यकों से संबंधित मानवाधिकार हनन के मामले बढ़े हैं. उधर वामपंथी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सच्चर समिति की रिपोर्ट को लागू न करने से उसने अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के वादे को नहीं निभाया है. राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री शकील अहमद ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2007-08 के दौरान देश में अल्पसंख्यकों से संबंधित मानवाधिकार हनन के कुल 12 हज़ार 794 मामले दर्ज किए गए. दूसरी ओर वर्ष 2006-07 के दौरान मानवाधिकार आयोग ने अल्पसंख्यकों से संबंधित मानवाधिकार हनन के 9603 मामले दर्ज किए. इस दौरान मुसलमानों से संबंधित मामले 8390 से बढ़कर 11 हज़ार 178 हो गए. सिखों से संबंधित मानवाधिकार हनन के मामले 851 से बढ़कर 1003 तक जा पहुँचे और ईसाइयों से संबंधित मामले 362 से बढ़ कर 613 हो गए. वामपंथियों का आरोप केंद्र ने अल्पसंख्यकों के हितों के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए 513 करोड़ रुपए अलग से देने का वादा किया था लेकिन अब तक मात्र 300 करोड़ रुपए ही इसके लिए दिए गए हैं सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ताज़ा वित्तीय वर्ष में 11 फ़रवरी तक के मिले आँकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में अल्पसंख्यकों से संबंधित मानवाधिकार हनन के कुल कुल 10 हज़ार 568 दर्ज हुए. इनमें मुसलमानों से संबंधित मामले सबसे ज़्यादा - 9248 हैं जबकि सिखों से संबंधित 877 मामले दर्ज हुए और ईसाइयों से संबंधित मामलों की संख्या 412 है. अल्पसंख्यकों के अधिकारों से संबंधित सरकारी वादों को पूरा कराने की माँग को लेकर नेशनल यूथ लीग़ के साथ नई दिल्ली में विऱोध धरने पर बैठे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव डी राजा ने कहा, "सच्चर समिति की रिपोर्ट ने मुसलमानों की स्थिति पर प्रकाश डाला है." उन्होंने कहा, "यूपीए सरकार महज़ वादे कर रही है और कह रही है कि वह इस संबंध में 15 सूत्रीय चार्टर लागू करेगी लेकिन अपने पाँच साल के कार्यकाल में उसने कुछ नहीं किया है." राजा ने कहा, "जब तक सरकार इस पर कुछ ठोस नहीं करती, सीपीआई नेशनल यूथ लीग़ के साथ मिलकर इस (मुस्लिम) समुदाय के साथ अन्याय का विरोध करेंगे." नेशनल यूथ लीग़ के इस धरने में वामपंथी दलों के अनेक नेताओं ने हिस्सा लिया है. लीग़ के अध्यक्ष सिराज इब्राहिम सैत ने यूपीए सरकार के शासन के दौरान अल्पसंख्यक हितों को नज़रअंदाज़ किए जानेके विरोध में नई दिल्ली से केरल तक जाने वाले कारवाँ को रवाना किया. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने आरोप लगाया, "केंद्र ने अल्पसंख्यकों के हितों के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए 513 करोड़ रुपए अलग से देने का वादा किया था लेकिन अब तक मात्र 300 करोड़ रुपए ही इसके लिए दिए गए हैं." उन्होंने कहा, "मुसलमान छात्रों को छात्रवृत्ति देने के लिए सरकार ने 2006 के बजट में वादा किया था लेकिन अब तक कुछ भी लागू नहीं किया गया है. हम अल्पसंख्यकों के लिए एक अलग योजना की माँग करते हैं. केवल तभी उनकी स्थिति सुधर सकती है."