पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार लोकसभा में मुस्लिम सांसदों की संख्या कम है।
2004 में 36 मुस्लिम सांसद जीते थे, जबकि इस बार केवल 28 सांसद ही जीते हैं। सबसे बड़ा धक्का समाजवादी पार्टी के मुस्लिम सांसदों को लगा। कल्याण सिंह की मेहरबानी से इस बार एसपी का एक भी मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया।
20 साल में यह पहला मौका है जब मुसलमानों ने एसपी से इस तरह किनारा किया हो। इस चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर अपने मुस्लिम, दलित और ब्राह्माण जनाधार को काफी हद तक वापस पाने में कामयाबी हासिल की है।
आबादी के 12 प्रतिशत के हिसाब से लोकसभा की 543 सीटों में से मुसलमानों का प्रतिनिधित्व 66 सीटों पर बनता है। मगर अभी तक हुए लोकसभा के 15 चुनावों में एक बार भी मुसलमानों को पूरा प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
सबसे ज्यादा 49 मुस्लिम कैंडिडेट 1980 में जीते थे।
2009 में सबसे ज्यादा 10 सांसद कांग्रेस के टिकट से जीते हैं। कांग्रेस इसे अपने पुराने दिनों की वापसी मान रही है। जब मुसलमान पूरी तरह उसके साथ हुआ करते थे।
कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमन इमरान किदवई कहते हैं कि मनमोहन सिंह सरकार ने पांच साल तक जो काम मुसलमानों के लिए किए, पार्टी उस बात को लोगों तक पहुंचाने में कामयाब रही। किदवई का कहना है कि मुसलमानों ने एसपी, बीएसपी सबको ताकतवर बनाया मगर बदले में इन पार्टियों ने उसे कुछ नहीं दिया।
कांग्रेस के बाद बीएसपी से 4, नैशनल कॉन्फ्रेंस से 4, तृणमूल कांग्रेस और केरल में इंडियन मुस्लिम लीग से से दो -दो मुसलमान सांसद जीते हैं। इसके बाद सीपीएम, जेडीयू, बीजेपी, डीएमके, असम के युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, आंध्र प्रदेश के मुस्लिम इत्तहादे से एक -एक मुस्लिम सांसद जीते हैं।
राज्यों के हिसाब से यूपी से सबसे ज्यादा 7 सांसद हैं, जबकि पिछली बार यहां से 11 मुस्लिम सांसद जीते थे। देश के केवल 9 राज्यों से ही मुस्लिम सांसद चुनकर आ पाए हैं। जबकि 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है। पश्चिम बंगाल से 6, जम्मू- कश्मीर से 4, बिहार से 3, असम, केरल, तमिलनाडु से दो-दो और आंध्र एवं लक्षद्वीप से एक - एक मुस्लिम सांसद चुनाव जीते हैं।
2004 में 36 मुस्लिम सांसद जीते थे, जबकि इस बार केवल 28 सांसद ही जीते हैं। सबसे बड़ा धक्का समाजवादी पार्टी के मुस्लिम सांसदों को लगा। कल्याण सिंह की मेहरबानी से इस बार एसपी का एक भी मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया।
20 साल में यह पहला मौका है जब मुसलमानों ने एसपी से इस तरह किनारा किया हो। इस चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर अपने मुस्लिम, दलित और ब्राह्माण जनाधार को काफी हद तक वापस पाने में कामयाबी हासिल की है।
आबादी के 12 प्रतिशत के हिसाब से लोकसभा की 543 सीटों में से मुसलमानों का प्रतिनिधित्व 66 सीटों पर बनता है। मगर अभी तक हुए लोकसभा के 15 चुनावों में एक बार भी मुसलमानों को पूरा प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
सबसे ज्यादा 49 मुस्लिम कैंडिडेट 1980 में जीते थे।
2009 में सबसे ज्यादा 10 सांसद कांग्रेस के टिकट से जीते हैं। कांग्रेस इसे अपने पुराने दिनों की वापसी मान रही है। जब मुसलमान पूरी तरह उसके साथ हुआ करते थे।
कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमन इमरान किदवई कहते हैं कि मनमोहन सिंह सरकार ने पांच साल तक जो काम मुसलमानों के लिए किए, पार्टी उस बात को लोगों तक पहुंचाने में कामयाब रही। किदवई का कहना है कि मुसलमानों ने एसपी, बीएसपी सबको ताकतवर बनाया मगर बदले में इन पार्टियों ने उसे कुछ नहीं दिया।
कांग्रेस के बाद बीएसपी से 4, नैशनल कॉन्फ्रेंस से 4, तृणमूल कांग्रेस और केरल में इंडियन मुस्लिम लीग से से दो -दो मुसलमान सांसद जीते हैं। इसके बाद सीपीएम, जेडीयू, बीजेपी, डीएमके, असम के युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, आंध्र प्रदेश के मुस्लिम इत्तहादे से एक -एक मुस्लिम सांसद जीते हैं।
राज्यों के हिसाब से यूपी से सबसे ज्यादा 7 सांसद हैं, जबकि पिछली बार यहां से 11 मुस्लिम सांसद जीते थे। देश के केवल 9 राज्यों से ही मुस्लिम सांसद चुनकर आ पाए हैं। जबकि 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है। पश्चिम बंगाल से 6, जम्मू- कश्मीर से 4, बिहार से 3, असम, केरल, तमिलनाडु से दो-दो और आंध्र एवं लक्षद्वीप से एक - एक मुस्लिम सांसद चुनाव जीते हैं।